
गुजराती नव वर्ष 2026: बेसतु वरस की तिथि
| तारीख | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
|---|---|
| सूर्योदय | सुबह 6:42 |
| प्रातःकाल | सुबह 6:42 – सुबह 8:54 |
समय उज्जैन के लिए IST में हैं।
इस पेज पर: गुजराती नव वर्ष का महत्व · गुजराती नव वर्ष की कथा · नव वर्ष की सुबह घर पर पूजा कैसे करें · गुजराती नव वर्ष पूजा सामग्री · क्षेत्रीय परंपराएँ · विक्रम संवत का नया वर्ष · गुजराती नव वर्ष की शुभकामनाएँ · चोपड़ा पूजन · गुजराती नव वर्ष की तिथियाँ · अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुजराती नव वर्ष 2026: 9 या 10 नवंबर?
गुजराती नव वर्ष 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है। उज्जैन में प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को सूर्योदय के समय रहती है। 9 नवंबर को यह दोपहर 12:32 बजे, सूर्योदय के बाद, आरंभ होती है।
गुजराती नव वर्ष का महत्व
बेसतु वरस, जिसे नूतन वर्ष या वर्ष प्रतिपदा भी कहते हैं, गुजराती वर्ष का पहला दिन है। यह कारतक सुद एकम को पड़ता है, यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, जो दीपावली की अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की पहली तिथि है।
गुजराती परिवारों के लिए साल वसंत में नहीं, दीपावली के साथ बदलता है। दीपावली की रात पुरानी बहियाँ बंद की जाती हैं और नई बहियों की पूजा होती है। नए वर्ष की सुबह प्रार्थना, मंदिर दर्शन और बड़ों का आशीर्वाद लेने से शुरुआत होती है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, सगे-संबंधियों और मित्रों के घर जाते हैं, एक-दूसरे को मिठाई और शुभकामनाएँ देते हैं, और आने वाले वर्ष में ईमानदारी की कमाई और घर में शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
बेसतु वरस की तिथि वही है जो गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और बलि प्रतिपदा की है। इसीलिए गुजरात के बहुत से मंदिरों में नव वर्ष की सुबह अन्नकूट दर्शन होते हैं।
गुजराती नव वर्ष की कथा
परंपरा इस संवत को उज्जैन के प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य से जोड़ती है, जिनके बारे में अनेक लोककथाएँ प्रचलित हैं। एक लोकप्रिय कथा के अनुसार शकों ने उज्जैन पर अधिकार कर लिया था, और यह संवत उन पर विक्रमादित्य की विजय से शुरू हुआ।
इतिहासकार इस बारे में अधिक सावधानी बरतते हैं। विक्रम नाम सामने आने से बहुत पहले के शिलालेखों में इस संवत को दूसरे नामों से पुकारा गया है, जिनमें कृत और मालव संवत भी हैं। शकों वाली बात का कोई ऐतिहासिक आधार नहीं मिलता। फिर भी आज त्योहार मनाने वाले परिवारों के लिए इस कथा का अर्थ बना हुआ है: एक ऐसा वर्ष जो एक धर्मात्मा राजा की स्मृति के साथ शुरू होता है।
नव वर्ष की सुबह घर पर पूजा कैसे करें
- जल्दी उठकर स्नान करें सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और नए या त्योहार वाले वस्त्र पहनें। इस दिन की असली रौनक सुबह ही होती है।
- रंगोली और दीये सँवारें प्रवेश द्वार की रंगोली को फिर से बनाएँ या सँवार दें, और नए साल के स्वागत में दरवाज़े पर दीये जलाएँ।
- गणेश जी से शुरुआत करें ऊपर दिए गए प्रातःकाल के समय में घर के मंदिर के सामने बैठें, पूरे वर्ष के लिए संकल्प लें और गणेश जी की छोटी-सी प्रार्थना करें।
- लक्ष्मी पूजा करें माँ लक्ष्मी को कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें, और नए वर्ष में ईमानदारी से मिलने वाली समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
- नई बहियों का सम्मान करें यदि आपके परिवार ने दीपावली की रात नई बहियाँ खोली हैं, तो उन्हें एक फूल अर्पित करें और तिलक लगाएँ।
- मंदिर दर्शन मंदिर में दर्शन करने जाएँ, और यदि आपके मंदिर में अन्नकूट होता है तो अन्नकूट दर्शन भी करें। बहुत से स्वामिनारायण और वैष्णव मंदिरों में भगवान के सामने भोजन का पर्वत सजाया जाता है।
- बड़ों का आशीर्वाद लें माता-पिता, दादा-दादी और घर के बड़े-बुज़ुर्गों के पास जाएँ, उन्हें नए साल की बधाई दें और उनका आशीर्वाद लें।
- मिठाई और भोजन बाँटें पड़ोसियों और मित्रों के साथ मिठाई का आदान-प्रदान करें और परिवार के साथ त्योहार का भोजन करें।
गुजराती नव वर्ष पूजा सामग्री
- गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति या चित्र
- नई बही, डायरी या कॉपी
- नई कलम
- कुमकुम
- हल्दी
- चंदन
- अक्षत
- फूल और गेंदे की माला
- घी या तेल के दीये
- अगरबत्ती
- कलश या जल से भरा लोटा
- रंगोली के रंग
- नैवेद्य और मेहमानों के लिए मिठाई
- मौसमी फल
- नए वस्त्र
क्षेत्रीय परंपराएँ
- सूरत, वडोदरा और पूरे गुजरात में
- व्यापारी परिवार नए साल की शुरुआत उन्हीं बहियों से करते हैं जिनकी दीपावली की रात चोपड़ा पूजन में पूजा की गई थी।
- स्वामिनारायण और पुष्टिमार्गीय मंदिर
- नव वर्ष की सुबह अन्नकूट, यानी भगवान को अर्पित भोजन के पर्वत, के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
- राजस्थान
- राजस्थान के कुछ समुदाय भी गुजरात की तरह इसी दिन को विक्रम संवत का नया वर्ष मानते हैं।
- विदेशों में बसे गुजराती समुदाय
- परिवार इस दिन घरों और मंदिरों में एक-दूसरे को बधाई देते हैं, और सामुदायिक कार्यक्रम अक्सर पास वाले सप्ताहांत पर रखे जाते हैं।
विक्रम संवत का नया वर्ष
गुजराती वर्ष विक्रम संवत के अनुसार चलता है। यह चंद्र और सौर गणना पर आधारित संवत है, जो अंग्रेज़ी कैलेंडर से कई दशक आगे चलता है। इसके महीने चंद्रमा के अनुसार चलते हैं, और हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त महीना, यानी अधिक मास, जोड़ा जाता है ताकि त्योहार अपनी ऋतु में ही पड़ें।
विक्रम संवत का नया वर्ष सब जगह एक ही दिन शुरू नहीं होता। उत्तर भारत के अधिकतर पंचांग इसे चैत्र में, वसंत ऋतु में शुरू करते हैं। गुजरात में यह दीपावली की अमावस्या के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, जबकि नेपाल इसके सौर रूप को अपने सरकारी कैलेंडर के रूप में अपनाता है।
गुजरात में नया वर्ष पारंपरिक व्यापारिक वर्ष की शुरुआत भी है। व्यापारी इसी समय नए खाते शुरू करते हैं, इसीलिए दीपावली के दिनों और नए वर्ष का बहियों से इतना गहरा नाता है।
गुजराती नव वर्ष की शुभकामनाएँ
- साल मुबारक: इसका अर्थ है "शुभ वर्ष"। साल यानी वर्ष और मुबारक यानी शुभ। गुजराती परिवारों में यह खूब प्रचलित बधाई है।
- नूतन वर्षाभिनंदन: यानी "नए वर्ष का अभिनंदन"। यह पारंपरिक शुभकामना है, जो बधाई कार्डों और संदेशों में खूब दिखती है।
- नवा वर्षनी शुभकामनाओ: यानी "नए वर्ष की शुभकामनाएँ"। गुजराती में नए साल की बधाई देने का यह सीधा, रोज़मर्रा का तरीका है।
चोपड़ा पूजन
चोपड़ा पूजन का अर्थ है हिसाब की बहियों, यानी चोपड़ा, की पूजा। अधिकतर गुजराती व्यापारी परिवार यह पूजा दीपावली के दिन ही, अमावस्या रहते हुए लक्ष्मी पूजा के समय करते हैं, ताकि पुराना व्यापारिक वर्ष प्रार्थना के साथ पूरा हो। इसे शारदा पूजन या मुहूर्त पूजन भी कहते हैं।
नई बहियाँ समृद्धि के लिए लक्ष्मी जी, निर्विघ्न शुरुआत के लिए गणेश जी, और निर्मल बुद्धि के लिए माँ शारदा, यानी सरस्वती, के सामने रखी जाती हैं। पहले पन्ने पर व्यापारी कुमकुम से स्वस्तिक बनाता है और शुभ-लाभ लिखता है, जिसका अर्थ है मंगल और लाभ।
कई परिवार बीते समय की भूलों के लिए क्षमा भी माँगते हैं और आने वाले वर्ष में ईमानदारी से कमाने की प्रार्थना करते हैं। बहुत-सी दुकानें शुक्ल पक्ष की पंचमी, यानी लाभ पंचम, को छोटी-सी पूजा के साथ विधिवत फिर से खुलती हैं।
गुजराती नव वर्ष की तिथियाँ
| दिन | तारीख |
|---|---|
| मंगलवार | 10 नवंबर 2026 |
| शनिवार | 30 अक्टूबर 2027 |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुजराती नव वर्ष 2026 का समय क्या है?
सूर्योदय: सुबह 6:42; प्रातःकाल: सुबह 6:42 – सुबह 8:54। समय उज्जैन के लिए IST में हैं।
क्या बेसतु वरस दीपावली के अगले दिन होता है?
हमेशा नहीं। बेसतु वरस कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है, जो दीपावली की अमावस्या के बाद की पहली तिथि है। अधिकतर यह दीपावली के अगले दिन पड़ता है, पर जब अमावस्या दीपावली के अगले दिन सूर्योदय तक रहती है, तब बेसतु वरस उसके एक दिन बाद आता है। इस वर्ष की तारीख इस पृष्ठ पर सबसे ऊपर दी गई है।
गुजराती नव वर्ष की बधाई कैसे दें?
"साल मुबारक" या "नूतन वर्षाभिनंदन" कहें। दोनों ही खूब प्रचलित हैं, और नूतन वर्षाभिनंदन पारंपरिक शुभकामना है।
चोपड़ा पूजन दीपावली पर होता है या बेसतु वरस पर?
अधिकतर गुजराती व्यापारी परिवार चोपड़ा पूजन दीपावली पर, लक्ष्मी पूजा के समय करते हैं। नई बहियों का उपयोग नए वर्ष से शुरू होता है, और दुकानें लाभ पंचम को फिर से खुलती हैं। हर परिवार की रीति अलग होती है, इसलिए अपनी परंपरा का पालन करें।
क्या बेसतु वरस और गोवर्धन पूजा एक ही हैं?
दोनों की तिथि एक ही है, पर ये अलग-अलग पर्व हैं। बेसतु वरस गुजराती नव वर्ष है, जबकि गोवर्धन पूजा और अन्नकूट में श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने का स्मरण किया जाता है। गुजरात के बहुत से मंदिरों में नव वर्ष की सुबह अन्नकूट मनाया जाता है।
गुजराती नव वर्ष दीपावली के बाद क्यों आता है?
गुजराती पंचांग विक्रम संवत का वर्ष कारतक सुद एकम से शुरू करता है, जो दीपावली की अमावस्या के बाद की पहली तिथि है। उत्तर भारत के अधिकतर पंचांग इसी संवत का वर्ष चैत्र से शुरू करते हैं।
क्या गुजरात में बेसतु वरस पर सरकारी छुट्टी होती है?
हाँ। पूरे गुजरात में इस दिन छुट्टी रहती है, और अधिकतर स्कूल, दफ़्तर और कारोबार बंद रहते हैं।
बेसतु वरस कब है?
बेसतु वरस कारतक सुद एकम, यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस वर्ष की तारीख और प्रातःकाल का समय इस पृष्ठ पर सबसे ऊपर दिया गया है।
गुजराती नव वर्ष किस संवत का नया साल है?
गुजराती नव वर्ष विक्रम संवत का नया साल है। गुजरात में इस संवत का वर्ष दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से बदलता है।
बेसतु वरस को और किन नामों से जाना जाता है?
इसे नूतन वर्ष, वर्ष प्रतिपदा और गुजराती नव वर्ष भी कहते हैं। बधाई के रूप में लोग "साल मुबारक" कहते हैं।


