
सोमवती अमावस्या 2026: तिथि और स्नान-दान समय
| तारीख | सोमवार, 9 नवंबर 2026 |
|---|---|
| अमावस्या आरंभ / समाप्त | सुबह 11:28, 8 नवंबर – दोपहर 12:32, 9 नवंबर |
| स्नान-दान, 9 नवंबर | सुबह 6:41 – दोपहर 12:32 |
समय उज्जैन के लिए IST में हैं।
इस पेज पर: सोमवती अमावस्या का महत्व · सोमवती अमावस्या की कथा · घर पर सोमवती अमावस्या की पूजा कैसे करें · सोमवती अमावस्या पूजा सामग्री · क्षेत्रीय परंपराएँ · पीपल की पूजा · सोमवती अमावस्या की तिथियाँ · अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोमवती अमावस्या का महत्व
सोमवती अमावस्या वह अमावस्या है जो सोमवार को पड़ती है। सोमवार भगवान शिव का वार है और अमावस्या पितरों की तिथि है, इसलिए दोनों के मेल से यह दिन शिव, परिवार के पितरों और पीपल के वृक्ष, तीनों के लिए रखा जाता है। अमावस्या तिथि का सोमवार को ही पड़ना ज़रूरी है, इसलिए यह ज़्यादातर वर्षों में एक या दो बार ही आती है, और परिवार पहले से इसकी तैयारी करते हैं।
यह दिन सबसे अधिक सुहागिन स्त्रियों के व्रत के लिए जाना जाता है। वे उपवास रखती हैं और पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए पीपल की पूजा करती हैं। भाव में यह वट पूर्णिमा जैसा है, जहाँ इसी प्रार्थना के लिए बरगद की पूजा होती है। कुछ परिवारों में कुँवारी कन्याएँ और संतान की कामना करने वाले दंपती भी यह व्रत रखते हैं, और शिव व पितरों के लिए यह दिन कोई भी मना सकता है।
इस दिन पवित्र नदी में स्नान का विशेष पुण्य माना गया है। हरिद्वार, वाराणसी और प्रयाग के संगम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करते हैं, और जो नदी तक नहीं जा पाते, वे नहाने के पानी में गंगाजल मिला लेते हैं। पितरों का तर्पण और दान इस दिन को पूर्ण करते हैं।
सोमवती अमावस्या की कथा
परंपरा के अनुसार इस दिन की महिमा भीष्म पितामह ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद युधिष्ठिर को बताई थी। जब अपने वंश के भविष्य को लेकर चिंतित युधिष्ठिर ने पूछा कि कुल फिर से कैसे बढ़े, तब भीष्म ने उन्हें सोमवार की अमावस्या के व्रत और उसके साथ होने वाले नदी स्नान के बारे में बताया।
पीपल के नीचे सुनाई जाने वाली कथा एक लोककथा है, और उसके विवरण अलग-अलग मिलते हैं। एक प्रतिष्ठित परिवार की युवती को किसी साधु ने बताया कि उसके भाग्य में विवाह नहीं लिखा है, या कुछ कथाओं के अनुसार कि वह विधवा हो जाएगी। साधु ने उसे सोमा (कुछ कथाओं में सोना) नाम की एक धर्मपरायण धोबिन की सेवा करने भेजा। वह युवती रोज़ सुबह सबके जागने से पहले चुपचाप धोबिन के घर का काम कर आती थी।
जब सोमा को पता चला कि उसकी मदद कौन कर रहा है, तो उसका मन भर आया और उसने युवती को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया। एक कथा के अनुसार इस आशीर्वाद के बदले सोमा के पति के प्राण चले गए, और वह सीधे उस पीपल के पास गई जिसकी वह रोज़ पूजा करती थी। अर्पित करने को उसके पास और कुछ नहीं था, तो उसने पीपल की 108 परिक्रमा की, और उसके पति फिर से जीवित हो गए। इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ सोमा की वही परिक्रमा दोहराती हैं।
घर पर सोमवती अमावस्या की पूजा कैसे करें
- सूर्योदय से पहले स्नान करें हो सके तो नदी में स्नान करें, नहीं तो नहाने के पानी में गंगाजल मिला लें।
- सूर्य को अर्घ्य दें उगते सूर्य की ओर मुख करके ताँबे के लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- संकल्प लें पूजा स्थान पर बैठकर अपना नाम और व्रत का उद्देश्य बोलें: पति की लंबी आयु, परिवार के किसी सदस्य का स्वास्थ्य, या पितरों की शांति।
- भगवान शिव की पूजा करें घर पर या पास के मंदिर में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएँ और ॐ नमः शिवाय का जाप करें।
- पीपल की पूजा करें पीपल की जड़ में जल, कच्चा दूध, रोली, चंदन, अक्षत, फूल और काले तिल अर्पित करें। पेड़ के पास घी का दीपक जलाएँ।
- परिक्रमा करें पेड़ के चारों ओर घूमते हुए तने पर कच्चा सूत या मौली लपेटते जाएँ। परंपरा 108 परिक्रमा की है, और हर परिक्रमा पर एक फल, फूल या मिठाई अर्पित की जाती है। इतनी परिक्रमा संभव न हो, तो जितनी हो सकें, श्रद्धा से पूरी करें।
- कथा सुनें और आरती करें पेड़ के पास या घर पर बैठकर सोमवती अमावस्या की व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और अंत में आरती करें।
- पितरों को याद करें यदि पिता अब जीवित नहीं हैं, तो अपने परिवार की रीति के अनुसार काले तिल मिला जल पितरों को अर्पित करें। बहुत से परिवार कौओं के लिए भोजन भी रखते हैं।
- दान करें ज़रूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अनाज दें। सुहागिन स्त्रियाँ अक्सर दूसरी स्त्रियों को चूड़ियाँ और बिंदी देती हैं, और कुछ सिंदूर भी देती हैं।
- व्रत खोलें पूजा के बाद फल या सादे शाकाहारी भोजन से व्रत खोलें। बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग लोग कठोर उपवास न रखें।
सोमवती अमावस्या पूजा सामग्री
- ताँबे का लोटा और साफ़ जल
- गंगाजल
- कच्चा दूध
- रोली या कुमकुम
- चंदन
- अक्षत (साबुत चावल)
- फूल
- काले तिल
- कच्चा सूत या लाल-पीली मौली
- हर परिक्रमा के लिए फल, फूल या मिठाई
- घी का दीपक और रुई की बत्तियाँ
- अगरबत्ती
- शिवजी के लिए बेलपत्र
- सुहाग दान के लिए चूड़ियाँ और बिंदी
- दान के लिए अनाज या वस्त्र
क्षेत्रीय परंपराएँ
- हरिद्वार
- लाखों श्रद्धालु सुबह से ही हर की पौड़ी और गंगा के दूसरे घाटों पर स्नान करते हैं, फिर तट पर ही तर्पण और दान करते हैं।
- वाराणसी और प्रयाग
- श्रद्धालु भोर में घाटों पर और संगम में स्नान करते हैं।
- उत्तर भारत
- सुहागिन स्त्रियाँ मोहल्ले के पीपल या मंदिर के आँगन में इकट्ठा होती हैं, परिक्रमा के साथ तने पर सूत लपेटती हैं और मिलकर कथा सुनती हैं।
पीपल की पूजा
पीपल, जिसे अश्वत्थ भी कहते हैं, ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों का निवास मानकर पूजा जाता है। पद्म पुराण इसे भगवान विष्णु से जोड़ता है, और भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ऐसे अश्वत्थ का उदाहरण देते हैं जिसकी जड़ें ऊपर और शाखाएँ नीचे हैं। बहुत से भक्त सामान्य दिनों में सुबह पीपल की सात परिक्रमा करते हैं; सोमवती अमावस्या पर यह संख्या 108 हो जाती है।
किसी मंदिर में या साफ़ सार्वजनिक जगह पर लगा पेड़ चुनें, और सुबह के समय जाएँ। जड़ में जल और दूध चढ़ाएँ, बाकी सामग्री अर्पित करें, और दीपक ज़मीन पर ऐसी जगह जलाएँ जहाँ उसकी लौ तने या सूखे पत्तों को न छुए।
परिक्रमा करते हुए सूत को तने पर लपेटते चलें, ताकि हर फेरे के साथ उसकी परत चढ़ती जाए। गिनती के लिए अनाज या फूलों की छोटी ढेरी रखें और हर फेरे पर एक दाना या फूल अलग रख दें। अगर पीपल तक न पहुँच सकें, तो घर पर शिव-पार्वती की पूजा करें और मन में वही प्रार्थना रखें।
सोमवती अमावस्या की तिथियाँ
| दिन | तारीख |
|---|---|
| सोमवार | 9 नवंबर 2026 |
| सोमवार | 8 मार्च 2027 |
| सोमवार | 2 अगस्त 2027 |
| सोमवार | 27 दिसंबर 2027 |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोमवती अमावस्या 2026 का समय क्या है?
अमावस्या आरंभ / समाप्त: सुबह 11:28, 8 नवंबर – दोपहर 12:32, 9 नवंबर; स्नान-दान, 9 नवंबर: सुबह 6:41 – दोपहर 12:32। समय उज्जैन के लिए IST में हैं।
सोमवती अमावस्या कब पड़ती है?
जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। अगली सोमवती अमावस्या की तिथि और स्नान-दान का समय इस पृष्ठ के ऊपर दिया गया है।
क्या सोमवती अमावस्या दुर्लभ होती है?
यह तभी आती है जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़े, जो आम तौर पर साल में एक या दो बार ही होता है। इसीलिए व्रत और नदी स्नान के लिए इसे विशेष अवसर माना जाता है।
सोमवती अमावस्या पर पीपल की कितनी परिक्रमा करें?
परंपरा 108 परिक्रमा की है, जिसमें तने पर कच्चा सूत या मौली लपेटी जाती है। स्वास्थ्य या समय साथ न दे, तो जितनी परिक्रमा हो सकें, श्रद्धा से पूरी करें।
क्या कुँवारी कन्याएँ सोमवती अमावस्या का व्रत रख सकती हैं?
हाँ। कुछ परिवारों में कुँवारी कन्याएँ अच्छे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं, और निःसंतान दंपती संतान की कामना से। पीपल की परिक्रमा मुख्य रूप से सुहागिन स्त्रियाँ करती हैं।
क्या पुरुष भी सोमवती अमावस्या मना सकते हैं?
हाँ। पुरुष अक्सर नदी स्नान करते हैं, भगवान शिव की पूजा करते हैं, पितरों का तर्पण करते हैं और दान देते हैं। स्त्रियों का व्रत इस दिन का एक हिस्सा है, पूरा दिन नहीं।
सोमवती अमावस्या पर क्या दान करें?
ज़रूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अनाज देना सामान्य दान है। सुहागिन स्त्रियाँ अक्सर दूसरी स्त्रियों को चूड़ियाँ और बिंदी देती हैं, और कुछ सिंदूर भी देती हैं। बहुत से परिवार गाय और कौओं को भी भोजन कराते हैं।
पास में पीपल का पेड़ न हो तो क्या पूजा कर सकते हैं?
हाँ। घर पर शिव-पार्वती की पूजा करें, सूर्य को अर्घ्य दें और दान करें। व्रत का भाव पेड़ से अधिक महत्त्व रखता है।
सोमवती अमावस्या पर स्नान कहाँ करें?
इस दिन पवित्र नदी में स्नान का विशेष पुण्य माना गया है, और हरिद्वार, वाराणसी तथा प्रयाग के संगम पर भारी भीड़ होती है। नदी तक न जा सकें, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।


